परिचय

अज़ीम प्रेमजी (24 जुलाई 1945 – 26 जुलाई 2023) भारतीय आईटी उद्योग के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में से एक थे।
वे विप्रो लिमिटेड के चेयरमैन और प्रमुख समाजसेवी रहे।
प्रेमजी ने सिर्फ व्यापार को नहीं, बल्कि समाज को भी नई दिशा दी।
उनका जीवन यह सिखाता है कि व्यापार में सफलता के साथ-साथ नैतिकता और समाज सेवा को भी प्राथमिकता दी जा सकती है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

अज़ीम प्रेमजी का जन्म 24 जुलाई 1945 को बेंगलुरु में हुआ।
उनके पिता मुहम्मद अली प्रेमजी एक सफल व्यवसायी थे।
अज़ीम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बेंगलुरु के सेंट जोसफ कॉलेज से पूरी की और आगे सिनेट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग में डिग्री ली।
बचपन से ही उनमें व्यवसाय और समाज के प्रति गहरी रुचि थी।

विप्रो के साथ करियर और योगदान

1966 में पिता के निधन के बाद अज़ीम प्रेमजी ने मात्र 21 वर्ष की उम्र में विप्रो की जिम्मेदारी संभाली।
उस समय कंपनी एक छोटा वनस्पति तेल उत्पादन व्यवसाय थी।
प्रेमजी ने इसे आईटी और सॉफ्टवेयर उद्योग में बदलकर वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।

1980 के दशक में उन्होंने विप्रो को कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में निवेश करने के लिए तैयार किया।
इसके परिणामस्वरूप, विप्रो भारतीय आईटी उद्योग का अग्रणी ब्रांड बन गया।

वैश्विक विस्तार और उपलब्धियाँ

  • विप्रो के माध्यम से आईटी और सॉफ्टवेयर उद्योग में अग्रणी भूमिका।
  • 1990 के दशक में अमेरिका और यूरोप में विप्रो का विस्तार।
  • 2020 तक, विप्रो ने 250,000 से अधिक कर्मचारियों को रोजगार प्रदान किया।
  • अज़ीम प्रेमजी को “भारतीय आईटी उद्योग के पितामह” के रूप में सम्मानित किया गया।

समाज सेवा और चैरिटी

अज़ीम प्रेमजी ने अपने निजी संपत्ति का लगभग 50% हिस्सा प्रेमजी फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में दान किया।
उन्होंने भारत में शिक्षा के क्षेत्र में कई पहलें कीं, विशेष रूप से ग्रामीण और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए।

उनके योगदान के कारण उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण (2005) और पद्म विभूषण (2011) से सम्मानित किया गया।

व्यक्तित्व और नेतृत्व शैली

अज़ीम प्रेमजी सादगी, ईमानदारी और नैतिकता के लिए जाने जाते थे।
वे अपने कर्मचारियों के साथ हमेशा विनम्र और प्रेरक थे।
उनके अनुसार, “व्यापार केवल लाभ कमाने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज के विकास का साधन भी है।”

प्रेरक विचार

“सफलता केवल धन कमाने में नहीं, बल्कि समाज के लिए योगदान देने में मापी जाती है।”

“अगर आप भविष्य में कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो हमेशा नैतिकता और ईमानदारी का पालन करें।”

निष्कर्ष और विरासत

अज़ीम प्रेमजी का जीवन भारतीय उद्योग और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
उन्होंने साबित किया कि व्यापार और समाज सेवा साथ-साथ चलते हैं।
उनकी सोच और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करेगा।

“व्यापार का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है।” – अज़ीम प्रेमजी

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