भारत में लैंगिक हिंसा एक गंभीर सामाजिक समस्या बनी हुई है। हाल के वर्षों में दर्ज कई प्रमुख बलात्कार प्रकरणों ने न केवल समाज को हिलाकर रख दिया है बल्कि न्याय प्रणाली की चुनौतियों को भी उजागर किया है। इस ब्लॉग में हम प्रमुख बलात्कार मामलों का विवरण देंगे, घटने की तारीख और आरोपी को फाशी या अन्य सजा हुई या नहीं, यह भी स्पष्ट करेंगे।

१. २२ अगस्त २०२४ – डिहिंग सामूहिक बलात्कार, आसाम

डिहिंग, आसाम में १४ वर्षीय लड़की के साथ दो वयस्क और एक अल्पवयीन ने सामूहिक बलात्कार किया। दो वयस्क आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। अल्पवयीन आरोपी बाल सुधार गृह में भेजा गया। मुख्य आरोपी तलाव में डूबने के कारण मृत्युमुखी हुआ। फाशी नहीं दी गई।

२. ९ अगस्त २०२४ – कोलकाता महिला डॉक्टर बलात्कार और हत्या

कोलकाता के आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज में ३१ वर्षीय महिला डॉक्टर का बलात्कार और हत्या किया गया। आरोपी संजय रॉय को जीवनभर कारावास की सजा दी गई; फाशी नहीं हुई।

३. अगस्त २०२४ – बद्लापूर स्कूल बालिका बलात्कार, महाराष्ट्र

बद्लापूर में दो चार वर्षीय बच्चियों के साथ स्कूल के स्वीपर ने बलात्कार किया। आरोपी अक्षय शिंदे पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश में मारा गया। शाळा के प्रबंधन पर भी कार्रवाई हुई। फाशी लागू नहीं हुई।

४. मार्च २०२५ – वाराणसी सामूहिक बलात्कार, उत्तर प्रदेश

वाराणसी में १९ वर्षीय युवती को २३ व्यक्तियों ने सामूहिक रूप से बलात्कार किया। १४ आरोपी गिरफ्तार किए गए। अभी न्यायालयीन प्रक्रिया चल रही है; फाशी नहीं हुई।

५. मार्च २०२५ – आग्राम बालिका बलात्कार और हत्या, उत्तर प्रदेश

५ वर्षीय बच्ची के साथ उसके मामाने और उनके मित्र ने बलात्कार किया और हत्या की। दोनों आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है।

६. २०२५ – भंडारा जिल्हा अल्पवयीन मुलीवर बलात्कार

भंडारा, महाराष्ट्र में १५ वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार हुआ। आरोपी को अटक किया गया है। पॉक्सो कानून के तहत आरोपी को सजा मिल सकती है; फाशी नहीं हुई।

७. २०२५ – साताराम महिला डॉक्टर आत्महत्या प्रकरण

साताराम, महाराष्ट्र में महिला डॉक्टर ने पुलिस अधिकारियों पर बलात्कार का आरोप लगाया। अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण उसने आत्महत्या की। आरोपियों को निलंबित किया गया; फाशी नहीं हुई।

८. २०२५ – पुणे महिला हत्या प्रकरण

पुणे में २० वर्षीय महिला के साथ बलात्कार और हत्या हुई। आरोपी को गिरफ्तार किया गया है; फाशी नहीं हुई। न्यायालयीन प्रक्रिया जारी है।

निष्कर्ष

ये सभी प्रकरण दिखाते हैं कि भारत में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय है। न्यायालयीन प्रक्रिया में देरी और दोषियों को फाशी या कठोर सजा न मिलना समाज के लिए गंभीर संदेश है। आवश्यक है कि सरकार, न्यायपालिका और समाज मिलकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और लैंगिक हिंसा को रोकने के लिए कड़े कदम उठाएं।

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