गुजरात बनाम महाराष्ट्र: 2014 से 2026 तक कितने प्रोजेक्ट गुजरात को गए?

2014 के बाद से भारत में औद्योगिक निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और मेगा प्रोजेक्ट्स को लेकर
गुजरात और महाराष्ट्र की तुलना लगातार चर्चा में रही है।
अक्सर सवाल पूछा जाता है —
“क्या महाराष्ट्र के प्रोजेक्ट गुजरात चले गए?”
और अगर हां, तो कितने?

इस ब्लॉग में हम राजनीति से अलग हटकर
तथ्यों, परियोजनाओं और नीतिगत कारणों के आधार पर
2014 से 18 जनवरी 2026 तक का पूरा विश्लेषण करेंगे।


सबसे पहले स्पष्ट करें: “प्रोजेक्ट पलायन” का मतलब क्या?

हर वह परियोजना जो गुजरात में लगी, जरूरी नहीं कि वह महाराष्ट्र से “छीन” ली गई हो।
प्रोजेक्ट पलायन तब माना जाता है जब:

  • कंपनी ने पहले महाराष्ट्र को प्राथमिक विकल्प माना हो
  • महाराष्ट्र में बातचीत / प्रस्ताव हुआ हो
  • बाद में वही प्रोजेक्ट गुजरात में फाइनल हो गया हो

इसी परिभाषा के आधार पर नीचे दिए गए प्रोजेक्ट्स को शामिल किया गया है।


2014–2026: महाराष्ट्र से गुजरात गए प्रमुख प्रोजेक्ट

1. वेदांता–फॉक्सकॉन सेमीकंडक्टर प्लांट

यह भारत का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर निवेश माना गया।
शुरुआती चर्चाएं महाराष्ट्र (पुणे/औरंगाबाद बेल्ट) के लिए थीं,
लेकिन अंततः यह प्रोजेक्ट गुजरात को मिला।

  • निवेश: लगभग ₹1.5–2 लाख करोड़
  • सेक्टर: सेमीकंडक्टर / इलेक्ट्रॉनिक्स
  • विवाद: सबसे ज्यादा चर्चित

2. टाटा–एयरबस C-295 विमान निर्माण यूनिट

रक्षा उत्पादन क्षेत्र का यह ऐतिहासिक प्रोजेक्ट
महाराष्ट्र के बजाय गुजरात (वडोदरा) को मिला।

  • सेक्टर: डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग
  • रणनीतिक महत्व: बहुत अधिक

3. बल्क ड्रग पार्क (फार्मा क्लस्टर)

केंद्र सरकार की योजना के तहत
महाराष्ट्र ने आवेदन किया था,
लेकिन अंतिम मंजूरी गुजरात को मिली।

4. GIFT City – इंटरनेशनल फाइनेंशियल हब

मुंबई को भारत का फाइनेंशियल कैपिटल माना जाता है,
इसलिए IFSC मुंबई में बनने की उम्मीद थी,
लेकिन GIFT City गुजरात में स्थापित हुआ।

5. बड़े सोलर और रिन्यूएबल मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट

धोलेरा, कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र में
कई बड़े सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगे
जो महाराष्ट्र में भी संभावित थे।

6. पोर्ट-बेस्ड पेट्रोकेमिकल और लॉजिस्टिक्स प्रोजेक्ट

गुजरात की लंबी समुद्री तटरेखा और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर
के कारण कई भारी उद्योग वहां शिफ्ट हुए।


तो कुल कितने प्रोजेक्ट “गुजरात को गए”?

प्रोजेक्ट श्रेणी संख्या (अनुमान)
बहुत बड़े राष्ट्रीय प्रोजेक्ट 5–6
मध्यम औद्योगिक प्रोजेक्ट 3–6
कुल अनुमान 8–12 प्रोजेक्ट

⚠️ ध्यान दें: यह संख्या मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक घोषणाओं पर आधारित है।
सरकार ने “महाराष्ट्र से गुजरात गए प्रोजेक्ट” की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की है।


गुजरात को प्रोजेक्ट क्यों मिले? (मुख्य कारण)

  • तेज सिंगल-विंडो क्लियरेंस
  • सस्ती और स्थिर बिजली
  • उद्योग-अनुकूल नीतियां
  • पोर्ट और लॉजिस्टिक्स एडवांटेज
  • जमीन अधिग्रहण में कम समय

क्या महाराष्ट्र पूरी तरह नुकसान में रहा?

बिल्कुल नहीं।

महाराष्ट्र को भी 2014 के बाद
कई बड़े और ऐतिहासिक प्रोजेक्ट मिले:

  • नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट
  • समृद्धि महामार्ग (मुंबई–नागपुर)
  • मुंबई मेट्रो की कई लाइनें
  • डेटा सेंटर और फिनटेक निवेश
  • स्टार्टअप और सर्विस सेक्टर ग्रोथ

निष्कर्ष (Final Verdict)

✔️ हां, 2014–2026 के बीच 8–12 प्रोजेक्ट ऐसे हैं
जो महाराष्ट्र से गुजरात को गए या गुजरात को मिले।
✔️ लेकिन यह कहना गलत होगा कि महाराष्ट्र पिछड़ गया
✔️ गुजरात ने मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री में बढ़त बनाई,
जबकि महाराष्ट्र फाइनेंस, सर्विस और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर में आगे रहा।

भारत के विकास के लिए दोनों राज्य
अपने-अपने मॉडल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।



Project-wise ₹ निवेश चार्ट, आगले ब्लॉग मे

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