अब जब हम देख चुके हैं कि लाखों भारतीय हर साल अपनी नागरिकता छोड़ रहे हैं, तो यह जानना भी जरूरी है कि क्या उतने ही विदेशी भारत की नागरिकता ले रहे हैं? इसका उत्तर है — नहीं। भारत में नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया जटिल, समय लेने वाली और सीमित है, इसलिए बहुत कम विदेशी भारतीय नागरिक बनना पसंद करते हैं। भारत का गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs – MHA) समय-समय पर संसद में यह आँकड़े जारी करता है। इन आँकड़ों के अनुसार, 2017 से 2021 के बीच सिर्फ 7,000–8,000 विदेशी नागरिकों ने भारतीय नागरिकता ली है। नीचे तालिका में यह विवरण दिया गया है:
वर्ष भारतीय नागरिकता प्राप्त करने वाले विदेशी नागरिक
2017 817
2018 628
2019 987
2020 639
2021 1,773
इन आँकड़ों को देखकर यह साफ है कि भारत में विदेशी नागरिकता अपनाने की दर बेहद कम है। हर साल औसतन 1,000 से भी कम लोग भारत के नागरिक बनते हैं, जबकि उसी अवधि में लाखों भारतीय अपनी नागरिकता छोड़ देते हैं।

क्यों बहुत कम विदेशी भारतीय नागरिकता लेते हैं?

  • 1. दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं: भारत में Dual Citizenship की अनुमति नहीं है। यानी किसी विदेशी को भारतीय नागरिक बनना है तो उसे अपनी पुरानी नागरिकता पूरी तरह छोड़नी होगी। यह कई लोगों के लिए बड़ा निर्णय होता है।
  • 2. OCI (Overseas Citizen of India) का विकल्प: भारत सरकार विदेशी मूल के भारतीयों को OCI कार्ड देती है, जिससे उन्हें वीज़ा-फ्री प्रवेश और निवेश की सुविधा मिलती है। इसलिए उन्हें पूर्ण नागरिकता लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
  • 3. कर और प्रशासनिक जटिलता: भारत की टैक्स व्यवस्था और कानूनी प्रक्रियाएँ अभी भी कई विदेशी नागरिकों के लिए कठिन मानी जाती हैं।
  • 4. रोजगार व मतदान अधिकारों की सीमाएँ: विदेशी नागरिक भारत में काम और निवेश कर सकते हैं, लेकिन नागरिक बनने के बाद भी कुछ संवैधानिक पदों के लिए पात्र नहीं होते।
  • 5. सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता की धारणा: कुछ विदेशी निवेशक भारत की विविधता और नीतिगत अनिश्चितता को लेकर सतर्क रहते हैं।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

जब किसी देश में नागरिकता अपनाने वालों की संख्या कम होती है, तो इसका असर विदेशी निवेश, कौशल विनिमय (Skill Exchange) और सांस्कृतिक विविधता पर पड़ता है। भारत की बड़ी जनसंख्या के बावजूद विदेशी नागरिकों की भागीदारी बहुत कम है, जो बताता है कि भारत को अभी भी Ease of Living और Ease of Doing Business के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है।

भारत की नीति और आगे का रास्ता

भारत सरकार ने अब Citizenship (Amendment) Act, 2019 के तहत कुछ विशेष श्रेणियों के लिए नागरिकता प्रक्रिया आसान की है, जैसे पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक समुदाय। लेकिन वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए भारत को अपनी नीति को और व्यावहारिक और पारदर्शी बनाना होगा, ताकि उच्च कौशल वाले विदेशी भारत में बसना पसंद करें। 👉 स्रोत: Ministry of Home Affairs – Citizenship Division Rajya Sabha Parliamentary Q&A Archive Press Information Bureau (PIB)

निष्कर्ष

2014 से 2025 के बीच लगभग 20 लाख भारतीय अपनी नागरिकता छोड़ चुके हैं, जबकि केवल 7,000–8,000 विदेशी नागरिक भारत की नागरिकता ग्रहण कर पाए हैं। यह असंतुलन बताता है कि भारत अभी भी “Migration-Out” देश है, यानी यहां से अधिक लोग बाहर जा रहे हैं, जबकि आने वाले बहुत कम हैं। अगर भारत को वैश्विक नागरिकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनना है, तो उसे अपनी नागरिकता नीति, कर ढाँचा और प्रशासनिक पारदर्शिता को और सुदृढ़ करना होगा। साथ ही, प्रवासी भारतीयों के लिए भी सीमित दोहरी नागरिकता जैसे विकल्पों पर गंभीर विचार किया जा सकता है। लेखक की टिप्पणी: यह पूरा विश्लेषण भारत सरकार के आधिकारिक स्रोतों — गृह मंत्रालय (MHA), विदेश मंत्रालय (MEA) और प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) — पर आधारित है। इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक पक्षपात नहीं है।

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